Saturday, May 10, 2014

खव्याइश है सिर्फ अब यही मेरी....



वो तेरा हंस के खिलखिलाना
दौड़ कर जाना
मुड़कर मुस्कुराना
मेरी ओर देखकर शरमाना
भी एक अदा है तेरी ........
वो मेरे पास बैठना
मुझसे मुंह मोड़ना
मेरी उस गलती पर रूठना
रूठकर आंसू बहाना
भी एक सजा हैं मेरी .......
पास मेरे वापस आना
प्यार से गले लगाना
गले लगाकर मेरी बाँहों में रोना
और मुस्कुराकर सॉरी कहना
भी जिंदगी दूजी है मेरी .......
प्यार से इसी तरह जीना
हर पल हँसते मुस्कुराते रहना
साथ में हर पल बीताना
आशीर्वाद सबका है पाना
और साथ गुजर जाये जिंदगी ये मेरी तेरी .......
ऐसा ही अरमान सिर्फ दिल में बसाना
न कभी अब रोना
सिर्फ है मुस्कुराना
हमेशा गुनगुनाना
दिल में हमेशा मुझे रखना
खव्याइश है सिर्फ अब यही मेरी ........
@@@ Vijay Nama

जीवन में सुख दुःख .....



दिन और रात एक बहाना है
जीवन में सुख दुःख तो आना जाना है
बीते दिनों को फिर से दोबारा
इतिहास बनकर दोहराना है
असफलता भरे दिनों को देखकर
दोबारा सफलता की ओर हाथ बढ़ाना है
हार मिले या मिले जीत फिर
हमे परिस्थितियों से जीत जाना है
कुछ खोकर या कुछ पाकर
हमें रोज रोना या मुस्कुराना है
जीवन की इस कठिन डगर में
हम ही हमारा सहारा हैं
बस साथ चलेंगे दोनों इसी तरह
और आगे कदम बढ़ाना है
हमारी इस खुशहाल जीवन की नैया
सिर्फ तुझे और मुझे ही पार लगाना है

हुआ फिर से ये सवेरा....



हुआ फिर से ये सवेरा,
फिर जीवन यूँ ही मुश्किलों से घिरा...
दिनभर क्या होगा,
कैसे कटेगा दिन ये सारा .....
यही सोच कर बार बार,
घटता जीवन हमारा ...
उठ कर लगे काम काज में,
की कोशिश खुश रहने की हर हाल में,
बटोरने को खुशियाँ, बीता दिया दिन सारा का सारा ..
शाम हुई, घर लौंटने की की तैयारी,
फिर बस का वाही सफ़र,
और पहुंचा घर मैं थका हारा ....
आई याद सुहानी तुम्हारी,
जब देखा दरवाजे पर लटका ताला,
खोल उसे जब घर में आया,
बदल कर कपडे पंखा चलाया,
तब जाकर दूर हुआ पसीना सारा...
फिर शुरू हुई यादों की दूसरी पारी,
एक में वो जीती तो दूसरी में मै हारा..
जीत उसकी तो भी याद तुम्हारी आई,
जीत मेरी तो भी याद तुम्हारी आई,
जब देखा पास अपने तो में तो था वाही,
पर पास तुम न आई,
तब जाकर परिणाम ये आया,
जीतें यादें या मै जीतूँ,
हर हाल में तो मै ही हारा..
हर हाल में तो मै ही हारा..
थोड़ी देर मिली रहत उस वीराने से,
कुछ खाया दूसरे के मन से और कुछ अपने मन से,
देख लैपटॉप को हुआ कुछ टाइम पास,
फिर भी बच गया बहुत सारा टाइम मेरे पास,
जब सुनी फ़ोन पर आवाज तुम्हारी,
लगा जीता जग मै सारा का सारा....
रात हुई फिर से एक बार,
था चारो तरफ अन्धकार ही अन्धकार,
और सोया हुआ था संसार सारा...
मै जागा था तेरे इंतजार में,
शायद दूरी कह लो या कह लो, था तेरे प्यार में,
ये हाल न था पहले मेरा,
ये हुआ केवल दो ही माह में,
कहे कोई इसे मेरा पागलपन,
या कह ले कोई इसे मेरा दीवानापन,
पर हकीकत में तो हैं,
ये प्यार हमारा...
ये प्यार हमारा...
पता नहीं कब लगी ये आँख,
और हुआ फिर से ये सवेरा...
हुआ फिर से हुआ सवेरा ....

भारत माता को सलाम ...



इस देश के कण कण को प्रणाम करता हूँ 
भारत माता को सलाम करता हूँ
नहीं करता परवाह में किसी की
पर हर सेना की टुकड़ी को सलाम करता हूँ
है अस्तित्व हमारा आज उन्ही की देन
आजाद तो हो चूका है देश बरसों पहले
आज हर इन्सान की आजादी का आह्वान करता हूँ
इस देश के कण कण को प्रणाम करता हूँ
भारत माता को सलाम करता हूँ ...........